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ये कहाँ आ गये हम…………?

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जय हिन्द दोस्तों ,
                           आप सभी का एक बार फ़िर स्वागत हैं । आप के अपने ब्लॉग "एक सवाल आप के लिए में"

ये कहाँ आ गये हम…… | कुछ याद आया, बिल्कुल सही समझा आप ने | ये एक पुरानी फ़िल्म का गाना ही हैं | पर आज अचानक यूँ , गानों या फ़िल्मों पर बात कैसे होनी लगी | यही सोच रहे हो ना | जरा रुको आप अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालो | मैं ही बता देता हूँ | आप सभी को तो पता ही हैं कि इस समय पुरी दुनिया का क्या हाल चल रहा हैं | और वहीं हमारे देश का तो पुछों ही मत | जहाँ एक तरफ़ पुरी दुनिया भयंकर महामारी के दौर से जुझ रही हैं | वहीं हमारा देश एक नहीं बल्कि दो-दो महामारी से अपने आप को बचाने की जद्दोजहैद में लगा हुआ हैं | अब आप कहेंगे कि ये दूसरी महामारी कौन सी हैं | तो वो हैं "चुनाव"|                                                                                                                                                                            क्या हुआ आप सब यूँ 😂😂😂😂😂😂 हंस क्यो रहे हों | अरे मैं सच कह रहा हुँ | आप भी ना | अब आप कहेंगे कि ये कोई महामारी थोड़ी हैं | ये तो हमारा अधिकार हैं और साथ में एक चुनावी प्रक्रिया भी जिसके द्रारा हम सब देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हैं | पर एक बार आप अपनी आंख बंद कीजिए और फ़िर कहिये | क्या आप सच में ऐसा ही करते हैं | आज देश के जो हालात हैं | वह किसी से छुपे नहीं हैं | एक तरफ़ लाखों की संख्या में हमारे देश में रोज कोरोना मरीज मिल रहें हैं | और वही दूसरी तरफ़ कई राज्यों में "चुनावी महाभारत" चल रही हैं | एक तरफ़ तो लॉक डाउन का सहारा लेकर पुरे अर्थव्यवस्था के पहियों पर जाम लगा दिया गया हैं | साथ हीं लोगों से भी ये अपील की जाती हैं कि वे घर में ही रहें | ताकि ये महामारी और ज्यादा भयानक रुप ना ले सके और आप सब सुरक्षित रह सकें और वहीं दूसरी तरफ़ सत्ता के कुछ हुक्मरां सत्ता का सिंहासन पाने के लिये लाखों लोगों को बैवजह अपने घरों से बहार निकाल कर चुनावी रैलियों को अंजाम दे रहे हैं | वाकई ये कहाँ आ गये हम "                                                                                                                                                     इस महामारी के दौर में जहाँ इन नेताओं के चुनावी मुद्दे चिकित्सा ( जो इस समय लोगों की सबसे बड़ी जरुरत हैं ) और शिक्षा ( जो पिछले एक वर्षो में ना जाने कितने बच्चों ने स्कूल का चेहरा तक नहीं देखा ) होना चाहिये थी | वहीं आज इन रैलियों के मुद्दे कहीं हिन्दुत्व तो कहीं आत्मसम्मान से जुड़े नजर आ रहे हैं | किसी का कहना हैं, कि में आप का रक्षक हूँ | तो किसी का कहना कि में मित्र | सब लगे हुये हैं अपना-अपना उल्लु सीधा करने में | आज जब जमीनीं हकीकत देखी तो समझ आया, कि हम आज भी वहीं हैं जहाँ कल थे | ना तो कल कुछ बदला था और ना आज | साल भर से ज्यादा हो गया हालात जस के तस नजर आ रहे हैं | अस्पताल जाओ तो बेड कि कमी और बेड मिल भी जाये तो ऑक्सीजन कि कमी और अगर जैसे-तैसे ऑक्सीजन मिल भी गयी तो दवाईयों का टोटा | वैसे कहने को तो ट्रांसपोटिंग बंद हैं पर इन सब को देखते हुये ये लगता है, कि लोगों का ऊपर का टिकट कटना तो पक्का हैं | पर इन सारी गलतियों का ठिकरा सरकार पर फोड़ना भी ठीक नहीं हैं कहीं ना कहीं हम भी इन सब के लिये उतने हीं जिम्मेदार हैं, जितना कि सरकार | पर फ़िर भी सवाल वही हैं, कि क्या इस समय चुनाव कराना इतना ज्यादा जरुरी था | ये सवाल आप के लिये………?                                                                               इस सवाल का जवाब कमेन्ट बॉक्स मे लिख कर के जरुर बताना साथ ही साथ अपनी राय भी दे | 

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