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खेला होबे कि खेला "ममता vs विपक्ष कार्यकर्ता": "खेला होबे कि खेला"ममता बेनर्जी की इस बात का टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने शायद कुछ ओर ही मतलब निकाल लिया था।एक तरफ़ जीत के बाद दीदी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओ से जीत का जश्न न मनाने की अपील कि थी,तो वहीं दूसरी तरफ़ सत्ता और जीत के नशे में चुर टीएमसी के कार्यकर्ता न सिर्फ़ जश्व मना रहे थे,बल्कि दूसरी और विपक्ष के कार्यकर्ताओं के साथ खून की होली भी खेल रहे थे। इस एक तरफ़ा खूनी झड़प में मरने वालों का आकड़ा 17 तक पहुँच गया हैं। जिसमे भाजपा ने दावा किया हैं कि 9 कार्यकर्ता उनकी पार्टी के हैं और बाकि कार्यकर्ता अन्य पार्टी के।इस हिंसा के बाद कई अन्य पार्टीयों के कार्यकर्ता बंगाल छोड़ कर अन्य पड़ोसी राज्यों में शरण ले चुके हैं।क्या खुब खेला खेला हैं।
जय हिन्द दोस्तों ,
आप सभी का एक बार फ़िर स्वागत हैं । आप के अपने ब्लॉग "एक सवाल आप के लिए में"
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HIGHLIGHTS:-
(1) बंगाल में फ़िर ममता सरकार
(2) दीदी गढ़ तो नहीं बचा पाई देखते हैं घर बचा पाएंगी य नहीं
(3) खेला होबे की खेला ' ममता VS विपक्ष कार्यकर्ता
बंगाल में फ़िर ममता सरकार: पश्चिम बंगाल में अखिरकार ममता सरकार ने जीत की हेट्रिक लगा ही ली। दीदी की टीएमसी पार्टी को 213 सीटे मिली हैं जबकि भाजपा को 77 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा हैं वहीं अन्य को 2 सीटे मिली हैं।इस जीत का पूरा श्रेय भी ममता दीदी को ही जाता हैं,क्यूंकी एक तरफ़ भाजपा के स्टार प्रचारक व दिग्गज राजनेता बड़ी-बड़ी रैलिया कर रहे थे।वहीं दूसरी ओर ममता बेनर्जी कमजोर पड़ती नजर आ रही थी। न तो उनकी पार्टी के लोग उनका साथ दे रहे थे और न तो उनका शरीर। पर इस चुनावी नतीजो के बाद जो परिणाम देखने को मिले वहां किसी आश्चर्य से कम नहीं थे। किसी ने भी नहीं सोचा था,कि ममता सरकार पं.बंगाल मे भाजपा को यूं मुँह के बल पटक देगीं। जिस प्रकार पोराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णू ने अपने तीन पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया था। ठीक उसी प्रकार ममता बेनर्जी ने भी सिर्फ़ एक पैर से पूरा बंगाल जीत लिया। शायद इसी को कहते हैं-woman's empowerment |
पर ये जीत तब और भी ज्यादा बेहतर और यादगार होती जब खुद ममता दीदी और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता इस जीत के जश्न को इस देश के माहौल को देखते हुए सादगी और सरलता से मनाती न की विपक्ष की पार्टी के कार्यकर्ताओं के खून से।
दीदी गढ़ तो नहीं बचा पायी,देखते हैं घर बचा पायेंगी य नहीं : पश्चिम बंगाल का पुरे चुनावी दौर में होटस्पोट रहा नन्दीग्राम से आखिरकार नाटकीय घटनाक्रम के तहत ममता बेनर्जी की हार की खबर सामने आई हैं। सुबेंदु अधिकारी ने उन्हें लगभग 1950 वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी हैं। इस सब घटनाओं को देखते हुए ममता बेनर्जी ने ये आरोप लगाया हैं,कि चुनाव परिणाम में कुछ बड़ी हेरफ़ेर की गयी हैं। उन्होने कहा हैं,कि इसे लेकर वह कोर्ट जाएंगी।इसी से साथ दीदी ने गढ़ तो बचा लिया हैं अब देखना हैं कि क्या 6 माह बाद वहा अपना घर ( यानी बंगाल ) बचा पाएंगी।
खेला होबे कि खेला "ममता vs विपक्ष कार्यकर्ता": "खेला होबे कि खेला"ममता बेनर्जी की इस बात का टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने शायद कुछ ओर ही मतलब निकाल लिया था।एक तरफ़ जीत के बाद दीदी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओ से जीत का जश्न न मनाने की अपील कि थी,तो वहीं दूसरी तरफ़ सत्ता और जीत के नशे में चुर टीएमसी के कार्यकर्ता न सिर्फ़ जश्व मना रहे थे,बल्कि दूसरी और विपक्ष के कार्यकर्ताओं के साथ खून की होली भी खेल रहे थे। इस एक तरफ़ा खूनी झड़प में मरने वालों का आकड़ा 17 तक पहुँच गया हैं। जिसमे भाजपा ने दावा किया हैं कि 9 कार्यकर्ता उनकी पार्टी के हैं और बाकि कार्यकर्ता अन्य पार्टी के।इस हिंसा के बाद कई अन्य पार्टीयों के कार्यकर्ता बंगाल छोड़ कर अन्य पड़ोसी राज्यों में शरण ले चुके हैं।क्या खुब खेला खेला हैं।
बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने कि मांग: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने कि मांग कि गयी है।कहा गया हैं कि चुनावी परिणाम के बाद हुई हिंसा पर नियंत्रण लगाने में राज्य सरकार पुरी तरह नाकाम रही हैं।कुछ लोगों कि ओर से यहा भी कहा जा रहा हैं,कि बंगाल को जलाने वाले गुंडो को सजा दी जाये।इस विषय पर प्रधानमंत्री ने भी बंगाल के गवर्नर से बात कर कानून व्यवस्था पर चिंता जताई हैंं।वहीं बंगाल के राज्यपाल ने भी पूरी शक्ति के आदेश दिये हैं।
आप सब इस बारे में क्या सोचते हैं।मुझे कमेंट बोक्स में कमेंट कर के जरूर बतायें और अगर आप को ये पोस्ट अच्छी लगे तो नीचे लाइक जरूरू करे।
धन्यवाद


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जवाब देंहटाएंमानना पड़ेगा ममता जी वाकई बंगाल टाइगर हैं ➕
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