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कुछ लोग मरने के लिए पैदा नहीं होते......|

जय हिन्द दोस्तों,
                            आप सभी का एक बार फ़िर स्वागत है, आप के अपने ब्लॉग "एक सवाल आप के लिए" में
आज हम आप से ना कोई सवाल करेंगें और ना कोई जवाब देंगे। बस आज हम आप को एक ऐसे इंसान के बारे में बताएगें। जिनकी उपलब्धियों के बारे में बात करे,तो शायद मेरे अल्फाज कम पड़ जायेंगे | पर उनकी उपलब्धियाँ कभी कम नहीं होंगी| इनका नाम ना तो किसी पहचान का मोह ताज है और ना मेरी इतनी औकात है की में इनकी पहचान आप से करा सकूँ | में बात कर रहा हूँ ,आजातशत्रु कहे जाने वाले कवि और सरस्वती पुत्र " भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी " की |


" अटल बिहारी वाजपेयी " किसी व्यक्ति का नाम नहीं है | बल्कि एक ऐसी विचारधारा का नाम है ,जो राष्ट्र के हर व्यक्ति को एक दूसरे से जोड़ती हैं |

अटल जी  का जन्म :- 
                                   अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1925 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ था | जब इनका जन्म हुआ, तो पिता जी ने इनका नाम " अटल " रखा और माता इन्हें " अटल्ला " कहकर बुलाती थी |
शायद इनके पिता को  यह पता था, की  मेरा पुत्र बड़ा होकर अपनी बाते, अपने काम और अपने इरादे पर हमेशा " अटल " खड़े रहेंगे  |

विचारधारा :-
                      अटल जी अपनी अलग विचारधारा के लिए भी जाने जाते थे, यह किसी एक धर्म,जाति या समुदाय के लोगों को नहीं बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा को साथ लेकर चलने वाले महान व्यक्ति थे | अटल जी अपने पूरे जीवन अविवाहित रहे | इन्होंने राजनीति व राष्ट्र के प्रति अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया |


" अटल जी " बहुमुखी  विद्या से परिपूर्ण थे | ये एक ओज और तेजस्वी प्रवक्ता होने के साथ-साथ एक राष्ट्रवादी कवि भी थे | ये कहना गलत नहीं होंगा, की अटल जी को कविता की विद्या विरासत में मिली थी और उस विरासत को बहुत ही सरल और आकर्षित तरीके से सहज कर लोगो के सामने प्रस्तुत करते थे | इनकी कुछ कविता है जैसे -
 
                                                    बाधाएँ आती हैं आए 
                                                     घिरे प्रलय की घोर घटाएँ
                                                  पाँव के नीचे अंगारे                       
                                                       सिर पर बरसे यदि ज्वालाएँ

                                                   निज हाथों में हँसते-हँसते
                                                        आग लगाकर जलना होगा
                                                    कदम मिलाकर चलना होगा
                                                          कदम मिलाकर चलना होगा


एक नयी पहल :-
                    अटल  जी और उनकी सरकार ने सत्ता में आने के मात्र 1 महीने बाद ही राजस्थान के पोखरण में 5 अंडर ग्राउंड सफल परमाणु परीक्षण करके भारत को एक नया परमाणु शक्ति देश  घोषित कर दिया | यह परमाणु परीक्षण दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु एजेंसी सी.आई.ए. के ठीक नाक के नीचे करके दुनिया को यह संदेश दे दिया, की हम ना कभी किसी के आगे झुके थे और ना कभी झुकेंगे | हम अपने देश व लोगों की रक्षा बखूबी करना जानते हैं | पर पश्चिमी देश कहा रुकने वाले थे, उन्होंने भारत पर कई सारे प्रतिबंध गला दिए | पर वाजपेयी सरकार ने सभी परेशानियों का मुंह तोड़ जवाब देते हुए कहा |

                                                                  हार नहीं मानूँगा,
                                                                   रार नई ठानूँगा,

 यह कहकर अटल जी ने परमाणु शक्ति की लिस्ट में अन्य देशों के साथ भारत को भी खड़ा कर दिया |

अटल जी ने पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की भी पहल की थी :-
                                                                                               पुराने गिले-सिकवे मिटाने के लिए अटल जी ने 19  फरवरी 1999 को"सदा-ए -सरहद" नाम से दिल्ली से लाहौर के लिए एक बस सेवा शुरू की और इस बस यात्रा के वे प्रथम यात्री बनकर खुद पाकिस्तान गये  और नवाज शरीफ से मिल कर दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की एक नयी पहल की |

उपलब्धियाँ :-
     (1)            1992  में  अटल जी को पद्म विभूषण जैसे बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया |
     (2)            1994  में सर्वश्रेष्ठ सांसद चुने गये और इसी वर्ष उन्हें लोकमान्य तिलक पुरस्कार से भी नवाजा गया|
     (3)            1998 में सबसे ईमानदार व्यक्ति का सम्मान उन्हें प्राप्त हुआ |
     (4)             2015"फ़्रेंड ऑफ बांग्लादेश  लिबरेशन वार आवार्ड " बांग्लादेश सरकार द्वारा दिया गया |
     (5)            और अब बारी थी देश कि शान कहे जाने वाले आवार्ड "भारत रत्न" की जो अटल जी की                                  उपलब्धियों के आगे खुद को उनके पास जाने से नहीं रोक सका |

मृत्यु :- 
             अपने पूरे जीवन इतने कड़े संघर्ष के बाद एक लम्बी बीमारी  के चलते 93 वर्ष की उम्र में पूरे भारतवासियों व उनके सभी चाहने वालों को अलविदा कहकर | वहा किसी अन्य दुनिया में चले गए | इस महापुरुष को आखिरी विदाई देते हुए | मेरे और आप सभी के तरफ से शत - शत नमन करते हैं और अपनी श्रद्धांजलि अर्जित करते हैं |

                                                             
                                                                     जय हिन्द दोस्तों

टिप्पणियाँ

  1. अटल जी आप हमारी यादों से कभी दूर नहीं होगे

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  2. Jab tak Suraj Chand Rahenga " Atal ji" Aap ka Naam Rahenga...

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