जय हिन्द दोस्तों,
आप सभी का फिर से स्वागत हैं | आप के अपने ब्लॉग " एक सवाल आप के लिये " में|
आज का सवाल :-
सिगनल पर खड़े गरीब बच्चों के हाथों में हमें भीक में 2 या 5 रुपये देना चाहिये या कलम और किताब .........?
एक दिन की बात हैं , उस दिन 15 अगस्त था | भारत की आज़ादी का दिन सभी लोग भारत की आज़ादी का जशन पुरे जोरों-शोरो से मना रहे थे | चारों तरफ बस भारत की आज़ादी के नारे हवाओं में गुंज रहे थे | वैसे तो हमारे देश में बहुत प्रदूषण होता है पर उस दिन भारत की हवाओं में एक अज़ीब सी खुशबु थी | यह बहुत काम देखने को मिलती हैं | तो फिर क्या था, बस हम भी निकल पड़े बाकियों की तरह उस खुशबु को महशूस करने और भारत की आज़ादी के जशन में शामिल होने के लिये | बस थोड़ी ही दूर चले थे, की सिगनल पर एक बच्चा खड़ा हुआ था | उसके हाथ में कुछ तिरंगे थे और वह चिल्ला रहा था |
"दस के दो..... दस के दो.... बाबू जी दस के दो तिरंगे"
बहुत लोग उसके सामने से गुजर गाये | पर किसी ने उसका एक भी तिरंगा नहीं खरीदा | मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा | मैं उसके पास गया और गाड़ी रोक कर उससे कहा |
" छोटू तिरंगे कितने के दिये "
उसने मुस्कुराते हुये कहा - " बाबु जी दस के दो "
मैंने कहा - ठीक हैं दो तिरंगे दे दे और उसे 100 का नोट दे कर वहां से जाने लगा |
ऐसा नहीं है, की मुझे पता नहीं था की मैंने उसे ज्यादा पैसे दिए हैं | मुझे पता था पर फिर भी में वहा से जाने लगा |
इतने में पीछे से एक आवाज आई |
" साहब-साहब रुकिये अपने बाकी पैसे तो ले जाओ "
उसके इतना कहते ही मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मैंने उससे बाकि पैसे वापस लेकर हंसी-मजाक करते हुए पूछा |
" क्यों रे छोटू.... तुझे पैसों की जरुरत नहीं हैं क्या....????
उसने जवाब दिया नहीं साहब....गरीब को बस मजदूरी मिल जाए इससे ज्यादा और कुछ नहीं चहिये........| |
साहब में झंडे जरूर बेचता हूँ पर ईमान नहीं ....
उस छोटे से बच्चे की बातों ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया की उस बच्चे के सामने मेरी सोच कितनी छोटी हैं | आये दिनों हर रोज अखबार में ना जाने कितने ही राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों की ईमानदारियों की धज्जियां उड़ते देखी है, लेकिन उस बच्चे का ईमान.....वहा रे हिन्दुस्तानी |
तब से मेरे मन में बस एक ही बात आती हैं, की काश बाकी सब लोगो का ईमान भी उस बचचे की तरह हो जाए |
|
उस बच्चे के लिए बस एक ही शब्द कहूँगा " छोटू तुझे और तेरे ईमान को सलाम " |
इसी के साथ आप सब भारतवासियों को 15 अगस्त " आजादी " की बहुत बहुत शुभकामनाए |
जय हिन्द दोस्तों
आप सभी का फिर से स्वागत हैं | आप के अपने ब्लॉग " एक सवाल आप के लिये " में|
आज का सवाल :-
सिगनल पर खड़े गरीब बच्चों के हाथों में हमें भीक में 2 या 5 रुपये देना चाहिये या कलम और किताब .........?
एक दिन की बात हैं , उस दिन 15 अगस्त था | भारत की आज़ादी का दिन सभी लोग भारत की आज़ादी का जशन पुरे जोरों-शोरो से मना रहे थे | चारों तरफ बस भारत की आज़ादी के नारे हवाओं में गुंज रहे थे | वैसे तो हमारे देश में बहुत प्रदूषण होता है पर उस दिन भारत की हवाओं में एक अज़ीब सी खुशबु थी | यह बहुत काम देखने को मिलती हैं | तो फिर क्या था, बस हम भी निकल पड़े बाकियों की तरह उस खुशबु को महशूस करने और भारत की आज़ादी के जशन में शामिल होने के लिये | बस थोड़ी ही दूर चले थे, की सिगनल पर एक बच्चा खड़ा हुआ था | उसके हाथ में कुछ तिरंगे थे और वह चिल्ला रहा था |
"दस के दो..... दस के दो.... बाबू जी दस के दो तिरंगे"
बहुत लोग उसके सामने से गुजर गाये | पर किसी ने उसका एक भी तिरंगा नहीं खरीदा | मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा | मैं उसके पास गया और गाड़ी रोक कर उससे कहा |
" छोटू तिरंगे कितने के दिये "
उसने मुस्कुराते हुये कहा - " बाबु जी दस के दो "
मैंने कहा - ठीक हैं दो तिरंगे दे दे और उसे 100 का नोट दे कर वहां से जाने लगा |
ऐसा नहीं है, की मुझे पता नहीं था की मैंने उसे ज्यादा पैसे दिए हैं | मुझे पता था पर फिर भी में वहा से जाने लगा |
इतने में पीछे से एक आवाज आई |
" साहब-साहब रुकिये अपने बाकी पैसे तो ले जाओ "
उसके इतना कहते ही मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मैंने उससे बाकि पैसे वापस लेकर हंसी-मजाक करते हुए पूछा |
" क्यों रे छोटू.... तुझे पैसों की जरुरत नहीं हैं क्या....????
उसने जवाब दिया नहीं साहब....गरीब को बस मजदूरी मिल जाए इससे ज्यादा और कुछ नहीं चहिये........| |
साहब में झंडे जरूर बेचता हूँ पर ईमान नहीं ....
उस छोटे से बच्चे की बातों ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया की उस बच्चे के सामने मेरी सोच कितनी छोटी हैं | आये दिनों हर रोज अखबार में ना जाने कितने ही राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों की ईमानदारियों की धज्जियां उड़ते देखी है, लेकिन उस बच्चे का ईमान.....वहा रे हिन्दुस्तानी |
तब से मेरे मन में बस एक ही बात आती हैं, की काश बाकी सब लोगो का ईमान भी उस बचचे की तरह हो जाए |
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उस बच्चे के लिए बस एक ही शब्द कहूँगा " छोटू तुझे और तेरे ईमान को सलाम " |
इसी के साथ आप सब भारतवासियों को 15 अगस्त " आजादी " की बहुत बहुत शुभकामनाए |
जय हिन्द दोस्तों

Jay hind sir
जवाब देंहटाएंJay hind sir
जवाब देंहटाएंbohat achchhi kahani hai " sai "
जवाब देंहटाएंus bachche ko salam
जवाब देंहटाएंkash asi imandari sab me hoti " jai hind "
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